नई दिल्ली | RBN News
केंद्रीय बजट 2026–27 में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर सॉफ्टवेयर विकास, आईटी आधारित सेवाओं, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) और सॉफ्टवेयर से जुड़ी कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेवाओं में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
वित्त मंत्री ने बताया कि ये सभी कारोबारी गतिविधियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और लंबे समय से उद्योग जगत की ओर से इन्हें एकीकृत ढांचे में लाने की मांग की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन सभी सेवाओं को एक साझा श्रेणी “इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज” के तहत शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।
इसके साथ ही, सरकार ने इस नई श्रेणी के अंतर्गत आने वाली सभी आईटी सेवाओं के लिए 15.5 प्रतिशत का समान सेफ हार्बर मार्जिन लागू करने की घोषणा की है। इस कदम से कर निर्धारण में स्पष्टता आएगी और ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत के आईटी और आईटीईएस सेक्टर के लिए कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देगा, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा और वैश्विक ग्राहकों के साथ काम कर रही कंपनियों को अधिक स्थिरता प्रदान करेगा।
उद्योग जगत का कहना है कि इस एकरूप व्यवस्था से न केवल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भारत की आईटी सेवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।





